काश कि होते हम
तुम्हारे कानों की बालियाँ
गुनगुनाया करते सरगोशी में
काश कि होते हम
तुम्हारी आँखों का काज़ल
पलकों में रहते साथ साथ
काश कि होते हम
तुम्हारे होठों की लालिमां
अल्फाजों में रंग भरते सिन्दूरी
काश कि होते हम
तुम्हारे माले का मोती
धड़कने सूना करते साफ़ साफ़.
काश कि होते हम
तुम्हारे आस्तीन का कपडा
गुदगुदाया करते सहलाकर
काश कि होते हम
तुम्हारे पायल के घुंघुरू
चाल पे छेड़ते साज़ नई
काश कि होते हम
तुम्हारे कमरे का बल्ब
निहारा करते सोते वक़्त
काश कि होते हम
कुछ तो तुम्हारे
अवधेश कुमार
4 weeks ago

jindagi me kabhi kabhi kash kash hi bankar rah jata hai ...........yahi jindgi ki bidambana hai.........
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