आज फिर
मैं हूँ और मेरी तन्हाई
ख़त्म हो गया दो पल का हंसी- मज़ाक
इन दोस्तों का हुल्लड़
फिर लब सिल गए
फिर छा गयी खामुशी.
बहुत देर से है कोई बात
जो लब तक आ आ कर लौट जा रही है.
अंधी सड़क पर / अहमद शामलू / श्रीविलास सिंह
8 hours ago
दिल की बात, सीधे दिल से
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