जब हवा महकने लगे
कोई नदी उनफने लगे
घटा भी बरसने लगे
समझो तुम गुनगुनायी हो.
कहीं कोयल कूकने लगे
पंछी वन में चहकने लगे
दरो दीवार चमकने लगे
समझो तुम मुस्कुरायी हो.
रुत में रंग गहरा हो जाये
सावन और सुनहरा हो जाये
सख्त चांदनी का पहरा हो जाये
समझो तुम घबरायी हो.
राही जब रास्ता भूले
मस्त पवन झूला झूले
खेतों में सरसों फूले
समझो एक ली अंगड़ाई हो.
खुदा ने बेहद सोचा होगा
भरपूर वक़्त लगाया होगा
कुदरत की हर चीज से
चुनकर तुम्हें बनाया होगा
बेशक
सबमें तुम समायी हो.
अवधेश कुमार
4 weeks ago

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