मैं जब उदास होता हूँ
आस्मां की तरफ देखता हूँ
उसके फैलाव और ऊँचाई को
मापता हूँ
उसकी आखों में झांकता हूँ
और महसूस करता हूँ
जैसे उसकी बाहें बुला रहीं हों मुझे.
जब मैं उदास होता हूँ
समंदर की तरफ देखता हूँ
उसकी लहरों को, उफान को
वेग और प्रवाह को
और महसूस करता हूँ
धडकनों में
उठते हुए तूफानों को.
जब कभी भी उदास होता हूँ
देखता हूँ चमकते हुए तारों को
हर हाल में
टिमटिमाते हुए
अंधेरों में
झिलमिलाते हुए
और महसूस करता हूँ
आँखों में
उम्मीद की एक नई किरण.
कुछ सवाल / पाब्लो नेरूदा / सुरेश सलिल
1 day ago

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